कविता
मेरी अंतिम विदा कहानी है...
मृत्यु भोर का उदय हुआ,अर्पित चित्त का चरित्र हुआ
वह व्यक्ति मृत्यु विजय प्राप्त कर, हर गाथा का व्यक्तित्व हुआ
इतिहास स्वर्ण पन्ने रचते, उन पन्नो में सपूत पुत्र का नाम हुआ
मृत्युंजय वह धरा बने जिसमें वह शहीद हुआ
ऐसी अब हर मौत बार बार जगानी है,मेरी अंतिम विदा कहानी है
मृत्यु विजय कर पार समुन्दर देश प्राणहित रक्त बहे
एक गोली तन पर हो,वह आजाद सी मौत रहे
फंदा भी लटक उठे,तख़्त शहीदों का खाली हो
उन सब वीर सपूतों में,खून श्रयवाली हो
ये अमर त्याग बलिदान जवानी है,मेरी अंतिम विदा कहानी है
वह मृत्यु प्राप्त कर अमर रहूँ, नित मृत्यु को वीर रहूँ
कण रक्त अमर कर हर एक रक्त ,जो भारत माँ की गोदी का भाग्य मिले
वह लहराए तिरंगा जग में जब, मृत्यु शहीद का गौर मिले
अब हर मौत बस ऐसी ही बुलानी है,मेरी अंतिम विदा कहानी है
मैं लहू देश के लिए बहाऊँ, बन पवित्र गंगा में नहाऊं
फिर जब भी अंतिम दिन आये,देश का तारा बन जाऊं
बस अंतिम सुख यही होगा,जो एक गज तिरंगा तन पर होगा
विश्वगुरु भारत अब हर पल अमर होगा
ऐसी अन्त कथा-ए-लुभानी है,मेरी अंतिम विदा कहानी है.....
-अंकुल वर्मा
अविस्मरणीय
ReplyDeleteधन्यवाद
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